ये भी इक तरकीब है दुश्मन से लड़ने की गले लगा लो जिस पर वार नहीं कर सकते
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वो पास क्या ज़रा सा मुस्कुरा के बैठ गया मैं इस मज़ाक़ को दिल से लगा के बैठ गया दरख़्त काट के जब थक गया लकड़हारा तो इक दरख़्त के साए में जा के बैठ गया
Zubair Ali Tabish
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न जाने क्यूँँ गले से लगने की हिम्मत नहीं होती न जाने क्यूँँ पिता के सामने बेटे नहीं खुलते
Kushal Dauneria
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ख़ुश्बू की बरसात नहीं कर पाते हैं हम ख़ुद ही शुरुआत नहीं कर पाते हैं जिस लड़की की बातें करते हैं सब सेे उस लड़की से बात नहीं कर पाते हैं
Gyan Prakash Akul
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इस तरह रोते हैं हम याद तुझे करते हुए जैसे तू होता तो सीने से लगा लेता हमें
Vikram Gaur Vairagi
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बात ही कब किसी की मानी है अपनी हठ पूरी कर के छोड़ोगी ये कलाई ये जिस्म और ये कमर तुम सुराही ज़रूर तोड़ोगी
Jaun Elia
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उस धोके ने तोड़ दिया है इतना मुझ को अब कुछ भी समझा लेती है दुनिया मुझ को
Shariq Kaifi
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बहुत जनाज़े थे रास्ते में क़दम भी हम गिन न पाए अपने
Shariq Kaifi
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पिछली बेंच का बच्चा है दिल इस को हाथ उठाने देना
Shariq Kaifi
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तेरी बातों में यूँँ भी आ गया मैं भटकने का बहुत दिल कर रहा था
Shariq Kaifi
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ले आता हूँ हर रिश्ते को झगड़े तक फिर झगड़े से काम चलाता रहता हूँ
Shariq Kaifi
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