ये दिसंबर भी गुज़र जाएगा पहले की तरह फिर तेरी याद में इक साल सताएगा मुझे
Related Sher
किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
162 likes
हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
157 likes
मैं भी इक शख़्स पे इक शर्त लगा बैठा था तुम भी इक रोज़ इसी खेल में हारोगे मुझे ईद के दिन की तरह तुम ने मुझे ज़ाया' किया मैं समझता था मुहब्बत से गुज़ारोगे मुझे
Ali Zaryoun
129 likes
प्यार दो बार थोड़ी होता है हो तो फिर प्यार थोड़ी होता है यही बेहतर है तुम उसे रोको मुझ सेे इनकार थोड़ी होता है
Zubair Ali Tabish
138 likes
सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ
Khwaja Meer Dard
127 likes
More from ''Akbar Rizvi"
कोई उठता नहीं मज़लूम का हामी बनकर कब तलक ज़ुल्म पा ख़ामोश रहेगी दुनिया
''Akbar Rizvi"
1 likes
देखलें अपना गिरेबाँ जो ज़माने वाले फिर किसी शख़्स पा उँगली न उठाएगा कोई
''Akbar Rizvi"
0 likes
बा'द में बिखरे अगर और भी होगा अफ़सोस मैं न बच्चों को नए ख़्वाब सजाने दूँगा
''Akbar Rizvi"
0 likes
अब भरोसा करें तो किस पे करें जिस तरफ़ देखो बे-वफ़ाई है
''Akbar Rizvi"
1 likes
दूर अहबाब से रहता हूँ यूँँ ही तो अकबर न पता कौन सा इक ज़ख़्म नया मिल जाए
''Akbar Rizvi"
0 likes
Similar Writers
Our suggestions based on ''Akbar Rizvi".
Similar Moods
More moods that pair well with ''Akbar Rizvi"'s sher.







