ये मेरा ज़ख़्म जितना सब्ज़ है उस के मुक़ाबिल कहीं ज़्यादा नमक नुक़सान उस का हो रहा है
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चाय पीते हैं कहीं बैठ के दोनों भाई जा चुकी है ना तो बस छोड़ चल आ जाने दे
Ali Zaryoun
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तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझ सेे तू किसी और ही मौसम की महक लाई थी डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे और तू मुट्ठियाँ भर-भर के नमक लाई थी
Tehzeeb Hafi
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भरम रखा है तेरे हिज्र का वरना क्या होता है मैं रोने पे आ जाऊँ तो झरना क्या होता है मेरा छोड़ो मैं नइँ थकता मेरा काम यही है लेकिन तुम ने इतने प्यार का करना क्या होता है
Tehzeeb Hafi
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तुम ने छोड़ा तो किसी और से टकराऊँगा मैं कैसे मुमकिन है कि अंधे का कहीं सर न लगे
Umair Najmi
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वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर आदत इस की भी आदमी सी है
Gulzar
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ज़िन्दाबाद करो उस आशिक़ का जो ज़ंजीरों में भी हँस कर बोल रहा पायल की छम छम ज़िन्दाबाद रहे
Atul K Rai
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नया पंचाँग टँग जाएगा घर में गुज़रते ही पुराना साल प्यारे
Atul K Rai
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नई पीढ़ी को आख़िर कौन कल रस्ता दिखाएगा बग़ीचे में पुराने पेड़ का होना ज़रूरी है
Atul K Rai
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इक दफ़ा बस इक दफ़ा उस को हमारे साथ कर छत पे फिर से बैठ कर तारे गिनेंगे रात कर खेल कोई हो विजयश्री प्रेम के हिस्से में लिख जितने धोखेबाज़ हैं हिस्से में उन के मात कर
Atul K Rai
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ज़रा सी देर उठने में हुई क्या लगे सब पाँव दक्षिण ओर करने
Atul K Rai
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