ये मुहब्बत भी है चीज़ कुछ काम की भाव रद्दी के भी दोस्त बिकता नहीं
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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मेरे होंटों पे अपनी प्यास रख दो और फिर सोचो कि इस के बा'द भी दुनिया में कुछ पाना ज़रूरी है
Waseem Barelvi
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वो गिरफ़्तार जो करे तो फिर गेसुओं के क़फ़स में मर जाए ये तमन्ना है एक आशिक़ की इश्क़ की दस्तरस में मर जाए
A R Sahil "Aleeg"
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नहीं ग़म हिज्र का कोई उसे छूने का मातम है
A R Sahil "Aleeg"
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मेरी फ़ितरत में थी पहले से ही ये ख़ामोशी मुझ को ख़ामोश ही कर डाला है ये नीश-ए-इश्क़
A R Sahil "Aleeg"
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मैं मेरा इश्क़ मेरी आशिक़ी मेरी वफ़ा सब कुछ मेरा गुमनाम ठहरा न मैं मजनूँ न मैं राँझा न मैं फ़रहाद फिर क्यूँ याद रक्खे कोई मुझ को
A R Sahil "Aleeg"
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न बदली है ज़मीं ये और ये अंबर नहीं बदला तुम्हारी याद बसती है तभी तो घर नहीं बदला कहीं ऐसा न हो तुम याद कर लो इस सबब हम ने बहुत बदले हैं मोबाइल मगर नंबर नहीं बदला
A R Sahil "Aleeg"
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