यूँँ ही नहीं हम दिल के हर जज़्बात लिखते हैं हर बात में जाँ डालकर हर बात लिखते हैं
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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नया कोई आशिक़ बनाया गया ये प्यारा सा रिश्ता जलाया गया
"Nadeem khan' Kaavish"
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सर्द मौसम यूँँ अचानक हो गया चाँद-सूरज लग रहे रूठे हुए
"Nadeem khan' Kaavish"
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वो आग सी इन होंठो पे रह कर हाँ प्यास मेरी बुझा रही हैं
"Nadeem khan' Kaavish"
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नज़र में हुस्न लाखों थे हमें पर वो ही प्यारा था
"Nadeem khan' Kaavish"
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ये जो आँखें हैं ना तेरी यहाँ इक घर हमारा था
"Nadeem khan' Kaavish"
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