zindagi ki bisat par 'baqi' maut ki ek chaal hain hum log
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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तरीक़े और भी हैं इस तरह परखा नहीं जाता चराग़ों को हवा के सामने रक्खा नहीं जाता मोहब्बत फ़ैसला करती है पहले चंद लम्हों में जहाँ पर इश्क़ होता है वहाँ सोचा नहीं जाता
Abrar Kashif
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तू मोहब्बत से कोई चाल तो चल हार जाने का हौसला है मुझे
Ahmad Faraz
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तुम मोहब्बत को खेल कहते हो हम ने बर्बाद ज़िंदगी कर ली
Bashir Badr
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सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ
Khwaja Meer Dard
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'बाक़ी' जो चुप रहोगे तो उट्ठेंगी उँगलियाँ है बोलना भी रस्म-ए-जहाँ बोलते रहो
Baqi Siddiqui
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तुम ज़माने की राह से आए वर्ना सीधा था रास्ता दिल का
Baqi Siddiqui
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वक़्त के पास हैं कुछ तस्वीरें कोई डूबा है कि उभरा देखो
Baqi Siddiqui
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हर नए हादसे पे हैरानी पहले होती थी अब नहीं होती
Baqi Siddiqui
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तुम भी उल्टी उल्टी बातें पूछते हो हम भी कैसी कैसी क़स में खाते हैं
Baqi Siddiqui
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