आज इक और बरस बीत गया उस के बग़ैर जिस के होते हुए होते थे ज़माने मेरे
Top 20 Sher Series
Top Shayari on New Year
Top Shayari on New Year ek clean reading flow me, writer aur full-detail links ke saath.
Total
20
Sher
20
Featured Picks
Series se pehle kuch standout sher padhein.
देखिए पाते हैं उश्शाक़ बुतों से क्या फ़ैज़ इक बरहमन ने कहा है कि ये साल अच्छा है
मिर्ज़ा ग़ालिब इस शेर में ज्योतिष की उम्मीद और प्यार की कठोर सच्चाई की तुलना कर रहे हैं। पंडित जी ने तो कह दिया है कि साल अच्छा है, मगर शायर सोच रहा है कि क्या उस 'अच्छे साल' का असर महबूब की बेरुखी पर भी पड़ेगा? प्रेमी के लिए साल तभी अच्छा माना जाता है जब उसका महबूब उस पर मेहरबान हो, चाहे सितारे कुछ भी कहें।
तू नया है तो दिखा सुब्ह नई शाम नई वर्ना इन आँखों ने देखे हैं नए साल कई
यकुम जनवरी है नया साल है दिसम्बर में पूछूँगा क्या हाल है
किसी को साल-ए-नौ की क्या मुबारकबाद दी जाए कैलन्डर के बदलने से मुक़द्दर कब बदलता है
उम्र का एक और साल गया वक़्त फिर हम पे ख़ाक डाल गया
पुराने साल की ठिठुरी हुई परछाइयाँ सिमटीं नए दिन का नया सूरज उफ़ुक़ पर उठता आता है
इक अजनबी के हाथ में दे कर हमारा हाथ लो साथ छोड़ने लगा आख़िर ये साल भी
चेहरे से झाड़ पिछले बरस की कुदूरतें दीवार से पुराना कैलन्डर उतार दे
दुल्हन बनी हुई हैं राहें जश्न मनाओ साल-ए-नौ के
मुबारक मुबारक नया साल आया ख़ुशी का समाँ सारी दुनिया पे छाया
बहार-ए-हुस्न ये दो दिन की चाँदनी है हुज़ूर जो बात अब की बरस है वो पार साल नहीं
नए साल में पिछली नफ़रत भुला दें चलो अपनी दुनिया को जन्नत बना दें
पलट सी गई है ज़माने की काया नया साल आया नया साल आया
आज इक और बरस बीत गया उस के बग़ैर जिस के होते हुए होते थे ज़माने मेरे
देखिए पाते हैं उश्शाक़ बुतों से क्या फ़ैज़ इक बरहमन ने कहा है कि ये साल अच्छा है
मिर्ज़ा ग़ालिब इस शेर में ज्योतिष की उम्मीद और प्यार की कठोर सच्चाई की तुलना कर रहे हैं। पंडित जी ने तो कह दिया है कि साल अच्छा है, मगर शायर सोच रहा है कि क्या उस 'अच्छे साल' का असर महबूब की बेरुखी पर भी पड़ेगा? प्रेमी के लिए साल तभी अच्छा माना जाता है जब उसका महबूब उस पर मेहरबान हो, चाहे सितारे कुछ भी कहें।
तू नया है तो दिखा सुब्ह नई शाम नई वर्ना इन आँखों ने देखे हैं नए साल कई
यकुम जनवरी है नया साल है दिसम्बर में पूछूँगा क्या हाल है
किसी को साल-ए-नौ की क्या मुबारकबाद दी जाए कैलन्डर के बदलने से मुक़द्दर कब बदलता है
उम्र का एक और साल गया वक़्त फिर हम पे ख़ाक डाल गया
पुराने साल की ठिठुरी हुई परछाइयाँ सिमटीं नए दिन का नया सूरज उफ़ुक़ पर उठता आता है
इक अजनबी के हाथ में दे कर हमारा हाथ लो साथ छोड़ने लगा आख़िर ये साल भी
ये किस ने फ़ोन पे दी साल-ए-नौ की तहनियत मुझ को तमन्ना रक़्स करती है तख़य्युल गुनगुनाता है
नए साल में पिछली नफ़रत भुला दें चलो अपनी दुनिया को जन्नत बना दें
दुल्हन बनी हुई हैं राहें जश्न मनाओ साल-ए-नौ के
नया साल दीवार पर टाँग दे पुराने बरस का कैलेंडर गिरा
पलट सी गई है ज़माने की काया नया साल आया नया साल आया
बहार-ए-हुस्न ये दो दिन की चाँदनी है हुज़ूर जो बात अब की बरस है वो पार साल नहीं
You have reached the end.
Explore Similar Collections
Top Shayari on New Year FAQs
Spirits rise high as Top 20 me kya milega?
Spirits rise high as ke selected sher readable cards, internal detail links, aur writer discovery ke saath milenge.
Kya is page ki links internal hain?
Haan, collection links, writer links aur detail links sab Kuch Alfaaz ke internal routes par map kiye gaye hain.
Collection ko kaise explore karein?
Type filter (Sher/Ghazal/Nazm), featured picks aur similar collections rail use karke fast discovery kar sakte hain.