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Top Shayari on New Year

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आज इक और बरस बीत गया उस के बग़ैर जिस के होते हुए होते थे ज़माने मेरे

देखिए पाते हैं उश्शाक़ बुतों से क्या फ़ैज़ इक बरहमन ने कहा है कि ये साल अच्छा है

मिर्ज़ा ग़ालिब इस शेर में ज्योतिष की उम्मीद और प्यार की कठोर सच्चाई की तुलना कर रहे हैं। पंडित जी ने तो कह दिया है कि साल अच्छा है, मगर शायर सोच रहा है कि क्या उस 'अच्छे साल' का असर महबूब की बेरुखी पर भी पड़ेगा? प्रेमी के लिए साल तभी अच्छा माना जाता है जब उसका महबूब उस पर मेहरबान हो, चाहे सितारे कुछ भी कहें।

तू नया है तो दिखा सुब्ह नई शाम नई वर्ना इन आँखों ने देखे हैं नए साल कई

यकुम जनवरी है नया साल है दिसम्बर में पूछूँगा क्या हाल है

किसी को साल-ए-नौ की क्या मुबारकबाद दी जाए कैलन्डर के बदलने से मुक़द्दर कब बदलता है

उम्र का एक और साल गया वक़्त फिर हम पे ख़ाक डाल गया

पुराने साल की ठिठुरी हुई परछाइयाँ सिमटीं नए दिन का नया सूरज उफ़ुक़ पर उठता आता है

इक अजनबी के हाथ में दे कर हमारा हाथ लो साथ छोड़ने लगा आख़िर ये साल भी

चेहरे से झाड़ पिछले बरस की कुदूरतें दीवार से पुराना कैलन्डर उतार दे

दुल्हन बनी हुई हैं राहें जश्न मनाओ साल-ए-नौ के

मुबारक मुबारक नया साल आया ख़ुशी का समाँ सारी दुनिया पे छाया

बहार-ए-हुस्न ये दो दिन की चाँदनी है हुज़ूर जो बात अब की बरस है वो पार साल नहीं

~ Unknown

नए साल में पिछली नफ़रत भुला दें चलो अपनी दुनिया को जन्नत बना दें

पलट सी गई है ज़माने की काया नया साल आया नया साल आया

आज इक और बरस बीत गया उस के बग़ैर जिस के होते हुए होते थे ज़माने मेरे

देखिए पाते हैं उश्शाक़ बुतों से क्या फ़ैज़ इक बरहमन ने कहा है कि ये साल अच्छा है

मिर्ज़ा ग़ालिब इस शेर में ज्योतिष की उम्मीद और प्यार की कठोर सच्चाई की तुलना कर रहे हैं। पंडित जी ने तो कह दिया है कि साल अच्छा है, मगर शायर सोच रहा है कि क्या उस 'अच्छे साल' का असर महबूब की बेरुखी पर भी पड़ेगा? प्रेमी के लिए साल तभी अच्छा माना जाता है जब उसका महबूब उस पर मेहरबान हो, चाहे सितारे कुछ भी कहें।

तू नया है तो दिखा सुब्ह नई शाम नई वर्ना इन आँखों ने देखे हैं नए साल कई

यकुम जनवरी है नया साल है दिसम्बर में पूछूँगा क्या हाल है

किसी को साल-ए-नौ की क्या मुबारकबाद दी जाए कैलन्डर के बदलने से मुक़द्दर कब बदलता है

उम्र का एक और साल गया वक़्त फिर हम पे ख़ाक डाल गया

पुराने साल की ठिठुरी हुई परछाइयाँ सिमटीं नए दिन का नया सूरज उफ़ुक़ पर उठता आता है

इक अजनबी के हाथ में दे कर हमारा हाथ लो साथ छोड़ने लगा आख़िर ये साल भी

ये किस ने फ़ोन पे दी साल-ए-नौ की तहनियत मुझ को तमन्ना रक़्स करती है तख़य्युल गुनगुनाता है

नए साल में पिछली नफ़रत भुला दें चलो अपनी दुनिया को जन्नत बना दें

दुल्हन बनी हुई हैं राहें जश्न मनाओ साल-ए-नौ के

नया साल दीवार पर टाँग दे पुराने बरस का कैलेंडर गिरा

पलट सी गई है ज़माने की काया नया साल आया नया साल आया

बहार-ए-हुस्न ये दो दिन की चाँदनी है हुज़ूर जो बात अब की बरस है वो पार साल नहीं

~ Unknown

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Top Shayari on New Year FAQs

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