"ज़िन्दगी उधार लगती है" जब से गए हो ज़िन्दगी उधार लगती है बिना तेरे मुझे हर रात बे-ईमान लगती है आ जाए अगर वापिस तो बाहों में समेटूँगा तुझे साँस तो लेता हूँ फिर क्यूँ ज़िन्दगी बेजान लगती है जब से गए हो ज़िन्दगी उधार लगती है यूँँ तुझे तो याद कर के दिन बीता लेता हूँ मैं आने की तेरी ताख़ में नैन बिछाए रखता हूँ मैं न जाने अब क्यूँ बिन तेरे अधूरी पहचान लगती है जब से गए हो ज़िन्दगी उधार लगती है नहीं मानता ये दिल मेरा पर कैसे सब भूल जाऊँ मैं चल ये बता इस दिल का क्या इलाज करवाऊँ मैं न जाने अब क्यूँ ज़िन्दगी उफ़ान लगती है जब से गए हो ज़िन्दगी उधार लगती है
Related Nazm
'हमारी बे-वफ़ा हम सफ़र' बे-सबब प्यार करते हैं तुझ से हम ने ये भी जताया नहीं है कब से तू ने निकाला है दिल से तू ने अब तक बताया नहीं है अपने चेहरे से चिलमन हटा ले हम ने जी भर के देखा नहीं है प्यार होगा मुकम्मल ये कैसे साथ तू ने निभाया नहीं है हम तेरे हैं तेरे ही रहेंगे तू ने अपना ही समझा नहीं है हम तो मजनूँ हुए तेरी ख़ातिर तुझ को हम ने सताया नहीं है प्यार के तोहफ़े हम ने जो दी हैं तू ने उस को भी रक्खा नहीं है रंजिशों में ही छोड़ा है तू ने हम ने मातम मनाया नहीं है बे-वफ़ा तू है 'दानिश' के दिल में तेरे दिल में क्यूँ 'दानिश' नहीं है तेरी ख़ातिर ये जाँ भी है हाज़िर तुझ को जुमला सुनाया नहीं है
Danish Balliavi
11 likes
'मतलबी' तेरा हुनर-ए-बेवफ़ाई अच्छा था वादों से मुकरना वाकई अच्छा था आज ये सब कैसे अरे बस ऐसे ही तुझे तो मालूम है न मैं कैसा हूँ , शायद अब मैं बिल्कुल तेरे जैसा हूँ मतलब पड़ने पर मैं तेरा हूँ मतलब ख़त्म होने पर ज़माने जैसा हूँ मैं ज़माने जैसा न बनता तो क्या करता मैं तुझ सा नहीं बनता तो क्या करता मैं कब तक तेरे लिए रोता रहता मैं आख़िर कब तक गलियों में, कूचों में, गाँव में, शहरों में, बाज़ारों में, खुले मैदानों में , जंगलों में, चर्च में, गुरुद्वारों में मस्जिदों में, मंदिरों में तुझे ढूँढ़ता रहता मैं अपनी ज़िन्दगी तेरे लिए क्यूँ बर्बाद करता फिर ज़ेहन में आया कि बदलना ही ठीक है तेरे हर वादों को भूलना ही ठीक है तेरी यादों को दिल से मिटाना ही ठीक है ज़माना मतलबी , दुनिया मतलबी हर शख़्स मतलबी तू भी मतलबी और अब मैं भी मतलबी
Rovej sheikh
10 likes
"बचपन की मुहब्बत" तू था मेरे दिल का रहबर तू कितने दिन याद आएगा तू छोड़ गया है मुझ को पर तू कितने दिन याद आएगा हाँ प्यार हुआ था बचपन में इक़रार हुआ था बचपन में सुन बचपन का मेरे दिलबर तू कितना ख़ुश है मेरे बिना ये दिल रोता है तेरे बिना तू था मंज़िल का राह-गुज़र अब प्यार मुहब्बत है ही नहीं रोने के सिवा अब कुछ भी नहीं बस अश्कों से दामन है तर तेरी यादें तड़पाती है उलफ़त में आग लगाती है कब लेगा तू 'दानिश' की ख़बर
Danish Balliavi
11 likes
"नज़्म-ए-ज़िन्दगी" ज़िन्दगी हबाब है ज़िन्दगी तो ख़्वाब है ज़िन्दगी क़िताब है ज़िन्दगी हिसाब है ज़िन्दगी शराब भी ज़िन्दगी रबाब है । ज़िन्दगी सवाल भी और कभी जवाब है साँस पर तनी हुई ज़िन्दगी तनाब है बेबसी ही बेबसी ज़िन्दगी अज़ाब है हाँ मगर कभी कभी ज़िन्दगी रुबाब है ज़िन्दगी गुलाब है ज़िन्दगी इताब है अस्ल में ये ज़िन्दगी बंद कोई बाब है
Navneet krishna
7 likes
"दोस्त के नाम ख़त" तुम ने हाल पूछा है हालत-ए-मोहब्बत में हाल का बताना क्या! दिल सिसक रहा हो तो ज़ख़्म का छुपाना क्या! तुम जो पूछ बैठे हो कुछ तो अब बताना है बात एक बहाना है तुम ने हाल पूछा है इक दिया जलाता हूँ ठीक है बताता हूँ रोज़ उस की यादों में दूर तक चले जाना जो भी था कहा उस ने अपने साथ दोहराना साँस जब रुके तो फिर अपनी मरती आँखों में उस की शक्ल ले आना और ज़िन्दगी पाना रोज़ ऐसे होता है कुछ पुराने मैसेज हैं जिन में उस की बातें हैं कुछ तबील सुब्हे हैं कुछ क़दीम रातें हैं मैं ने उस की बातों में ज़िन्दगी गुज़ारी है ज़िन्दगी मिटाने का हौसला नहीं मुझ में एक एक लफ़्ज़ उस का साँस में पिरोया है, रूह में समोया है उस के जितने मैसेज है रोज़ खोल लेता हूँ उस सेे कह नहीं पाता ख़ुद से बोल लेता हूँ उस के पेज पर जा कर रोज़ देखता हूँ मैं आज कितने लोगों ने उस की पैरवी की है और सोचता हूँ मैं ये नसीब वाले हैं उस को देख सकते हैं उस सेे बात करते हैं ये इजाज़तों वाले मुझ सेे कितने बेहतर हैं मैं तो दाग़ था कोई जो मिटा दिया उस ने गर मिटा दिया उस ने ठीक ही किया उस ने, तुम ने हाल पूछा था लो बता दिया मैं ने जो भी कुछ बताया है उस को मत बता देना पढ़ के रो पड़ो तो फिर इन तमाम लफ़्ज़ों को बस गले लगा लेना, वो मेरी मोहब्बत है और सदा रहेगी वो जब नहीं रहूँगा तो एक दिन कहेगी वो तुम अली फ़क़त तुम थे जिस ने मुझ को चाहा था जिस ने मेरे माथे को चूम कर बताया था तुम दुआ का चेहरा हो तुम हया का पहरा हो मैं तो तब नहीं हूँगा पर मेरी सभी नज़्में उस की बात सुन लेंगी तुम भी मुस्कुरा देना फिर बहुत मोहब्बत से उस को सब बता देना उस के नर्म हाथों में मेरा ख़त थमा देना लो ये ख़त तुम्हारा है और उस की जानिब से वो जो बस तुम्हारा था आज भी तुम्हारा है
Ali Zaryoun
70 likes
More from Kushal "PARINDA"
"तेरे ज़ेहन में" तेरे ज़ेहन में क्या चल रहा है जान मुझे सब पता चल रहा है मुझ से नज़रें चुरा रही हो तुम तेरी नज़रों से पता चल रहा है जो दिल कभी धड़कता था मुझे देख कर वो अब थम सा चुका है ये पता चल रहा है वो मोहब्बत जो मेरी थी कभी आज किसी और की है ये पता चल रहा है तेरे ज़ेहन में क्या चल रहा है जान मुझे सब पता चल रहा है मुझ से नज़रें चुरा रही हो तुम तेरी नज़रों से पता चल रहा है ये अश्क न बहाओ मेरे सामने तुम ये अश्क झूठे है ये पता चल रहा है जो जुदाई पर मर जाने की बात किया करती थी आज वो किसी ओर पर मरती है ये पता चल रहा है तेरे ज़ेहन में क्या चल रहा है जान मुझे सब पता चल रहा है मुझ से नज़रें चुरा रही हो तुम तेरी नज़रों से पता चल रहा है
Kushal "PARINDA"
1 likes
"ऐसा कहाँ होता है" सही सुना था जहाँ आग जलती है धुआँ वहीं होता है हर बार मोहब्बत में यार मिल जाए, ऐसा कहाँ होता है वैसे तो इश्क़ मेरा इक तरफ़ा ही था उस के दरमियाँ वरना दो तरफ़ा मोहब्बत में बे-वफ़ाई हो जाए ऐसा कहाँ होता है सही सुना था के जहाँ आग जलती है धुआँ वहीं होता है हर बार मोहब्बत में यार मिल जाए, ऐसा कहाँ होता है अगर इश्क़ में लैला नहीं थी वो, तो मजनू नहीं हूँ मैं अगर इश्क़ में हीर नहीं थी वो, तो रांझा भी नहीं हूँ मैं उसे सच्चा इश्क़ होता तो आ कर बताती मुझे वरना इश्क़ में वफ़ा करने पर, ऐसा कहाँ होता है सही सुना था के जहाँ आग जलती है धुआँ वहीं होता है हर बार मोहब्बत में यार मिल जाए, ऐसा कहाँ होता है मैं इश्क़ ज़ाहिर करता रहा वो बे-वफ़ाई से कभी बाज़ ना आई मैं इश्क़ में उस के क़रीब आता रहा पर वो कभी मेरे पास ना आई मैं बड़ी शिद्दत-मुद्दत से पाना चाहता था उसे फिर सोचता हूँ कि ये सब करने पर भी इश्क़ में ऐसा कहाँ होता है सही सुना था के जहाँ आग जलती है धुआँ वहीं होता है हर बार मोहब्बत में यार मिल जाए, ऐसा कहाँ होता है अक्सर उस की बे-वफ़ाई के क़िस्से सुना करता था मैं कभी दोस्तों से तो कभी ग़ैरों से सुना करता था मैं इश्क़ था "कुशल" को इस लिए यक़ीं न हुआ वरना दोस्तों की बातों पर शक हो जाए ऐसा कहाँ होता है सही सुना था जहाँ आग जलती है धुआँ वहीं होता है हर बार मोहब्बत में यार मिल जाए, ऐसा कहाँ होता है वैसे तो इश्क़ मेरा इक तरफ़ा ही था उस के दरमियाँ वरना दो तरफ़ा मोहब्बत में बे-वफ़ाई हो जाए ऐसा कहाँ होता है
Kushal "PARINDA"
1 likes
"मेरे दिल में है इक वो निशाँ" मेरे दिल में है इक वो निशाँ जिसे छेड़ता हर एक है तुझे ना दिखे क्यूँ वो निशाँ जिसे देखता हर एक है छोड़ रहने दे, दर्द सहने दे जो ना कहना था, वो भी कहने दे इश्क़ दरिया में मुझ को बहने दे मेरा दिल तो है इक आइना जिसे तोड़ता हर एक है तुझ को पाया था, दिल में बसाया था इश्क़ कर दिल को यूँँ सताया था इश्क़ कर ख़ुद को भी रुलाया था मेरे दिल की कुछ ऐसी ज़मीं जिसे छोड़ता हर एक है मेरे दिल में है इक वो निशाँ जिसे छेड़ता हर एक है तुझे ना दिखे क्यूँ वो निशाँ जिसे देखता हर एक है
Kushal "PARINDA"
1 likes
"तेरे जाने पे" तेरे जाने पे रोया ज़रूर था मगर टूटा नहीं था मैं मैं आशिक़ सच्चा था तेरी तरह झूठा नहीं था मैं तुझे जाना ही था तो चुप-चाप चली जाती तोड़ने को कोई खिलौना नहीं था मैं तेरे जाने पे रोया ज़रूर था मगर टूटा नहीं था मैं तेरे वादे-क़समों की याद में रोया भी और हँसा भी तेरी झूठी ख़्वाहिशों के नीचे दबा भी और पिसा भी तुझे लगा चुप रहता हूँ मैं कोई मासूम बच्चा नहीं था मैं तेरे जाने पे रोया ज़रूर था मगर टूटा नहीं था मैं तेरी यादों में दिन और रात दोनों गुज़ार लिया करता हूँ मैं पहले तेरे नैनों से तो अब मैख़ानों से पी लिया करता हूँ मैं तुझे लगा नशे में रहता हूँ, कोई शराबी नहीं था मैं तेरे जाने पे रोया ज़रूर था मगर टूटा नहीं था मैं सोचता हूँ तू तो प्यार-प्यार किया करती थी 'कुशल' से जुदाई की बात पर मर जाने की बात किया करती थी तुझे लगा तेरे खेल को न समझ पाऊँगा मैं न समझ पाऊँ कोई गँवार नहीं था मैं तेरे जाने पे रोया ज़रूर था मगर टूटा नहीं था मैं मैं आशिक़ सच्चा था तेरी तरह झूठा नहीं था मैं तुझे जाना ही था तो चुप चाप चली जाती तोड़ने को कोई खिलौना नहीं था मैं तेरे जाने पे रोया ज़रूर था मगर टूटा नहीं था मैं
Kushal "PARINDA"
2 likes
"माँ-बाप बिना" वो गहना नहीं जो माँ-बाप बिना, हर किसी को मैं भा जाऊँगा। वो शक्स नहीं जो इन के सिवा, हर किसी को पसंद आ जाऊँगा। मैं रिश्ते बनाने आया हूँ, कोई सौदा न कर के जाऊँगा। माँ-बाप से बढ़कर रिश्ता न कोई ये तुम्हें बता कर जाऊँगा। वो गहना नहीं जो माँ-बाप बिना, हर किसी को मैं भा जाऊँगा। माँ कोख में ले कर चलती है, पिता सोच में ले कर चलते है। बच्चों को कोई तकलीफ़ न हो, फर्ज़ों का बोझ उठा कर चलते है। अपनी क़लम से लिख इनका, गुणगान भी कर के जाऊँगा। वो गहना नहीं जो माँ-बाप बिना, हर किसी को मैं भा जाऊँगा। माँ-बाप के लाड़ प्यार में, डाँट तो बेशक होती है। बच्चे कितने भी हो लेकिन, उन्हे फ़िक्र सभी की होती है। उन की इस शिक्षा से मैं, हर मैदान फतेह कर जाऊँगा। वो गहना नहीं जो माँ-बाप बिना, हर किसी को मैं भा जाऊँगा। कैसे भूलूँ आधीरात में, माँ का गीले से सूखे पर सुलाना। कैसे भूलूँ उस बाप को, अपना पेट काट मुझ को खिलाना। मैं तुम दोनो के बलिदान का, कभी कर्ज चुका न पाऊँगा। वो गहना नहीं जो माँ-बाप बिना, हर किसी को मैं भा जाऊँगा। उन बच्चों के भी क्या कहने, जो माँ-बाप से अलग हो जाते है। उन सेे कोई तकलीफ़ न हो, वृद्ध आश्रम छोड़कर जाते है। रब्ब बोले ऐसी औलाद को, कभी माफ़ न मैं कर पाऊँगा। वो गहना नहीं जो माँ-बाप बिना, हर किसी को मैं भा जाऊँगा। वो शक्स नहीं जो इन के सिवा, हर किसी को पसंद आ जाऊँगा। मैं रिश्ते बनाने आया हूँ, कोई सौदा न कर के जाऊँगा। माँ-बाप से बढ़कर रिश्ता न कोई ये तुम्हें बता कर जाऊँगा।
Kushal "PARINDA"
4 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Kushal "PARINDA".
Similar Moods
More moods that pair well with Kushal "PARINDA"'s nazm.







