अलमास धरे रह जाते हैं बिकता है तो पत्थर बिकता है अजनास नहीं इस दुनिया में इंसाँ का मुक़द्दर बिकता है 'खालिद सज्जाद' सुनार हूँ मैं इस ग़म को ख़ूब समझता हूँ जब बेटा छुप कर रोता है तब माँ का ज़ेवर बिकता है
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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
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मंज़िलें क्या हैं, रास्ता क्या है हौसला हो तो फ़ासला क्या है
Aalok Shrivastav
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उस को फ़ुर्सत नहीं मिलती कि पलट कर देखे हम ही दीवाने हैं दीवाने बने रहते हैं
Waseem Barelvi
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ये शहर-ए-अजनबी में अब किसे जा कर बताएँ हम कहाँ के रहने वाले हैं कहाँ की याद आती है
Ashu Mishra
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कैसा दिल और इस के क्या ग़म जी यूँँ ही बातें बनाते हैं हम जी
Jaun Elia
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मंज़र बना हुआ हूँ नज़ारे के साथ मैं कितनी नज़र मिलाऊँ सितारे के साथ मैं दरिया से एक घूँट उठाने के वास्ते भागा हूँ कितनी दूर किनारे के साथ मैं
Khalid Sajjad
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ज़ब्त का ऐसे इम्तिहान न ले ऐ मेरी जान मेरी जान न ले
Khalid Sajjad
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ज़हीफ़ी इस लिए मुझ को सुहानी लग रही है इसे कमाने में पूरी जवानी लग रही है नतीजा ये है कि बरसों तलाश-ए-ज़ात के बा'द वहाँ खड़ा हूँ जहाँ रेत पानी लग रही है
Khalid Sajjad
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