sherKuch Alfaaz

अलमास धरे रह जाते हैं बिकता है तो पत्थर बिकता है अजनास नहीं इस दुनिया में इंसाँ का मुक़द्दर बिकता है 'खालिद सज्जाद' सुनार हूँ मैं इस ग़म को ख़ूब समझता हूँ जब बेटा छुप कर रोता है तब माँ का ज़ेवर बिकता है

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