बड़ा ही नाज़ है इस चाँद को सूरत पे अपनी, पर कभी जो धूप में निकले तो सूरज में बदल जाए
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वो जिस पर उस की रहमत हो वो दौलत माँगता है क्या मोहब्बत करने वाला दिल मोहब्बत माँगते है क्या तुम्हारा दिल कहे जब भी उजाला बन के आ जाना कभी उगता हुआ सूरज इजाज़त माँगता है क्या
Ankita Singh
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इतनी मिलती है मिरी ग़ज़लों से सूरत तेरी लोग तुझ को मिरा महबूब समझते होंगे
Bashir Badr
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मेरे होंटों पे अपनी प्यास रख दो और फिर सोचो कि इस के बा'द भी दुनिया में कुछ पाना ज़रूरी है
Waseem Barelvi
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मैं चाहता था मुझ सेे बिछड़ कर वो ख़ुश रहे लेकिन वो ख़ुश हुआ तो बड़ा दुख हुआ मुझे
Umair Najmi
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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शिफ़ा की बात आए तो सुख़न की मार मिलती है दिल-ए-बीमार को उम्मीद भी बीमार मिलती है
Prit
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मिज़ाज़ी इश्क़ मेरा तब हक़ीक़ी ही हो गया जो ज़िंदगी में नहीं वो ही ज़िंदगी हो गया
Prit
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तुम ने आदत बदलनी थी अपनी आदतन ख़ुद नहीं बदलना था
Prit
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इश्क़ उस वक़्त बाज़ी जीत गया हार का हार पहना जब दिल ने
Prit
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मैं सहरा था वो बारिश थी वो बरसे ऐसी ख़्वाहिश थी वो बरसी फिर सैलाब आया और अब बचने की गुंजाइश थी
Prit
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