कॉल पर कॉल हमदम करे है राह दुश्वार मौसम करे है बीच मँझधार में फँस गया हूँ आँख ये मसअला नम करे है
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उन की सोहबत में गए सँभले दोबारा टूटे हम किसी शख़्स को दे दे के सहारा टूटे ये अजब रस्म है बिल्कुल न समझ आई हमें प्यार भी हम ही करें दिल भी हमारा टूटे
Vikram Gaur Vairagi
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तुम्हारे शहर का मौसम बड़ा सुहाना लगे मैं एक शाम चुरा लूँ अगर बुरा न लगे
Qaisar-ul-Jafri
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तुम्हारे पाँव क़सम से बहुत ही प्यारे हैं ख़ुदा करे मेरे बच्चों की इन में जन्नत हो
Rafi Raza
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और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा
Faiz Ahmad Faiz
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सौ सौ उमीदें बँधती है इक इक निगाह पर मुझ को न ऐसे प्यार से देखा करे कोई
Allama Iqbal
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यार की यार से जुदाई है हिज्र की याद से लड़ाई है ग़म से मेरा उदास है बिस्तर याद तेरी 'ज़फर' जो आई है
Zafar Siddqui
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ज़ुल्म की इंतिहा बुरी होगी सोच कर बस ये मर गया कोई
Zafar Siddqui
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मिल रहा है गले ज़फ़र दुश्मन ईद ऐसी बहार लाई है
Zafar Siddqui
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ख़्वाब ये जाने क्यूँ मुझ को शब आ गए प्यासे लब पर मिरे तेरे लब आ गए मैं तो मदहोश बाँहों में तेरी हुआ दिन मिरे या'नी अच्छे ही अब आ गए
Zafar Siddqui
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यूँँ सितम उस ने माँ पे ढाया है माँ के ज़ेवर ही बेच आया है चापलूसी है करता बीवी की और माँ को फ़क़त सताया है
Zafar Siddqui
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