चाँदनी रात में तारों पे ग़ज़ल कहना है आज फिर चाँद की आँखों पे ग़ज़ल कहना है इतना आसाँ नहीं उस के लिए कुछ भी कहना यूँँ समझ लीजिए ख़्वाबों पे ग़ज़ल कहना है
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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हासिल न कर पाया तुझे मैं मिन्नतों के बा'द भी उम्मीद सेंटा से लगाना लाज़मी भी है मिरा
Harsh saxena
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दर-ब-दर ढूँढ़ रहे हैं जिसे अरसे से हम शख़्स वो मेरी ही आँखों में छिपा बैठा है
Harsh saxena
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दुनिया के भरम को कुछ यूँँ तोड़ दिया मैं ने इस बार नसीबों का रुख़ मोड़ दिया मैं ने
Harsh saxena
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हम ने सँभाल रक्खे हैं अपनी तिज़ोरी में उस के दिए वो तोहफ़े नहीं हैं ख़ज़ाने हैं
Harsh saxena
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रंग सारे फीके फीके ही लगेंगे मुझ को अब उन की आँखों का जो काला सुर्मा देखा है अभी
Harsh saxena
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