sherKuch Alfaaz

चूमने की रस्म बाक़ी है अभी भी डर है पहले देह को उबटन न चू में

Neeraj Neer19 Likes

Related Sher

दौलत शोहरत बीवी बच्चे अच्छा घर और अच्छे दोस्त कुछ तो है जो इन के बा'द भी हासिल करना बाक़ी है कभी-कभी तो दिल करता है चलती रेल से कूद पड़ूॅं फिर कहता हूँ पागल अब तो थोड़ा रस्ता बाक़ी है

Zia Mazkoor

91 likes

ये ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाए तो अच्छा इस रात की तक़दीर सँवर जाए तो अच्छा जिस तरह से थोड़ी सी तेरे साथ कटी है बाक़ी भी उसी तरह गुज़र जाए तो अच्छा

Sahir Ludhianvi

84 likes

मन में एक इरादा होता है ताबिश राजा पहले प्यादा होता है ताबिश मानता हूँ मजबूरियाँ थीं कुछ दिक्कत थी पर वा'दा तो वा'दा होता है ताबिश

Vishal Singh Tabish

75 likes

अभी ज़िंदा है माँ मेरी मुझे कुछ भी नहीं होगा मैं घर से जब निकलता हूँ दुआ भी साथ चलती है

Munawwar Rana

74 likes

इस से पहले कि तुझे और सहारा न मिले मैं तिरे साथ हूँ जब तक मिरे जैसा न मिले

Afkar Alvi

70 likes

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Neeraj Neer.

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Neeraj Neer's sher.