चूमने की रस्म बाक़ी है अभी भी डर है पहले देह को उबटन न चू में
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दौलत शोहरत बीवी बच्चे अच्छा घर और अच्छे दोस्त कुछ तो है जो इन के बा'द भी हासिल करना बाक़ी है कभी-कभी तो दिल करता है चलती रेल से कूद पड़ूॅं फिर कहता हूँ पागल अब तो थोड़ा रस्ता बाक़ी है
Zia Mazkoor
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ये ज़ुल्फ़ अगर खुल के बिखर जाए तो अच्छा इस रात की तक़दीर सँवर जाए तो अच्छा जिस तरह से थोड़ी सी तेरे साथ कटी है बाक़ी भी उसी तरह गुज़र जाए तो अच्छा
Sahir Ludhianvi
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मन में एक इरादा होता है ताबिश राजा पहले प्यादा होता है ताबिश मानता हूँ मजबूरियाँ थीं कुछ दिक्कत थी पर वा'दा तो वा'दा होता है ताबिश
Vishal Singh Tabish
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अभी ज़िंदा है माँ मेरी मुझे कुछ भी नहीं होगा मैं घर से जब निकलता हूँ दुआ भी साथ चलती है
Munawwar Rana
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इस से पहले कि तुझे और सहारा न मिले मैं तिरे साथ हूँ जब तक मिरे जैसा न मिले
Afkar Alvi
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वहम होता है कि छूने से सँवर जाएँगी सोचता हूँ जो मुक़द्दर मिरा ज़ुल्फ़ें तेरी
Neeraj Neer
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न पूछो मुझ सेे कैसी लगती हूँ मैं 'नीर' साड़ी में किसे अच्छे नहीं लगते मिरी जाँ गाने नुसरत के
Neeraj Neer
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ठीक है मैं फेर लेता हूँ नज़र को तुम भी झुमके से कहो गर्दन न चू में
Neeraj Neer
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फिर वही रोना मुहब्बत में गिला शिकवा जहाँ से रस्म है बस इस लिए भी तुम को साल-ए-नौ मुबारक
Neeraj Neer
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इक दिए से एक कमरा भी बहुत है दिल जलाने से ये घर रौशन हुआ है
Neeraj Neer
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