धूल मिट्टी हो ज़मीं और काम कितना हो कहीं भी साथ मिल कर के सनम हम साफ़ पूरा घर करेंगे साथ झाड़ू साथ पोछा साथ मिल कर के धुलाई हर दीवाली में सफ़ाई साथ हम मिल कर करेंगे
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आज देखा है तुझ को देर के बा'द आज का दिन गुज़र न जाए कहीं
Nasir Kazmi
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प्यास अगर मेरी बुझा दे तो मैं जानू वरना तू समुंदर है तो होगा मेरे किस काम का है
Rahat Indori
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ख़ुद को इतना भी मत बचाया कर बारिशें हों तो भीग जाया कर काम ले कुछ हसीन होंठों से बातों बातों में मुस्कुराया कर
Shakeel Azmi
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तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझ सेे तू किसी और ही मौसम की महक लाई थी डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे और तू मुट्ठियाँ भर-भर के नमक लाई थी
Tehzeeb Hafi
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ज़मीं पे घर बनाया है मगर जन्नत में रहते हैं हमारी ख़ुश-नसीबी है कि हम भारत में रहते हैं
Mehshar Afridi
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मन की मन में ही भुनाने में लगे हो हाथ में जो है निकलता जा रहा है
Divya 'Kumar Sahab'
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यही वो लोग जब माँगो मदद मुँह फेर लेते हैं यही वो हैं जो कहते हैं मदद कोई नहीं करता
Divya 'Kumar Sahab'
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मनेगी इस तरह तुम देखना दीपावली अपनी कहोगे हाथ छोड़ो भी पकौड़े जल रहे हैं जी
Divya 'Kumar Sahab'
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जितने जुड़े थे ख़ून से वो तो सभी रिश्ते हुए इस के परे वो एक रिश्ता मित्रता समझा गई
Divya 'Kumar Sahab'
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बस मोहब्बत बाँटने का ये असर हम पर हुआ वो हमीं हैं जो किसी के भी पसंदीदा नहीं
Divya 'Kumar Sahab'
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