हिफ़ाज़त भी शरारत भी हिदायत भी मुहब्बत भी तुम्हारे ही लिए था सब तुम्हीं पे वार देता हूँ फ़क़त मेरी वजह से तुम सदा ग़मगीन रहती हो चलो तुम सेे अलग होकर तुम्हें मैं तार देता हूँ
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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मुद्दतों बा'द इक शख़्स से मिलने के लिए आइना देखा गया, बाल सँवारे गए
Jaun Elia
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ज़िंदगी भर के लिए दिल पे निशानी पड़ जाए बात ऐसी न लिखो, लिख के मिटानी पड़ जाए
Aadil Rasheed
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आँख में नम तक आ पहुँचा हूँ उस के ग़म तक आ पहुँचा हूँ पहली बार मुहब्बत की थी आख़िरी दम तक आ पहुँचा हूँ
Khalil Ur Rehman Qamar
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तुम्हारे शहर का मौसम बड़ा सुहाना लगे मैं एक शाम चुरा लूँ अगर बुरा न लगे
Qaisar-ul-Jafri
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लग रहा बेहद भला वो देखने में रूप से आँका गया है आदमी को
Sani Singh
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कैसे बदलेगी दशा एवं दिशा इस देश की चुन रहे नेता युवा जब क़ाफ़िलों को देख कर
Sani Singh
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किसी को याद हर पल कर रहा हूँ यक़ीनन ये मुसलसल कर रहा हूँ मुकम्मल हो नहीं पाई मुहब्बत सो अब ग़ज़लें मुकम्मल कर रहा हूँ
Sani Singh
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सभी अरमान से जाएगा इक दिन बनाई शान से जाएगा इक दिन किसी को टूट कर के चाहता है वो लड़का जान से जाएगा इक दिन
Sani Singh
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कोई तो जादू है उन की ख़ूब-सूरत नज़रों में इक नज़र देखा है जब से ज़िंदगी रौशन हुई
Sani Singh
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