हमें मालूम था इस इश्क़ में ऐसा ही होता है किसी पर जाँ छिड़कते हैं किसी से दिल लगाते हैं
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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तस्फ़िया-नफ़्स को करें हासिल हर दुआ पर ख़ुदा कहेगा कुन
A R Sahil "Aleeg"
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रहम करो निजी मुआमला का रंग तो न दो जो शे'र हैं फ़क़त वो शे'र ही हैं और कुछ नहीं
A R Sahil "Aleeg"
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मैं भी अब टूट कर आइने सा गया हूँ बिखर इश्क़ में जब से फेरी हैं तुम ने निगाहें सनम
A R Sahil "Aleeg"
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मुझ पर ये ज़ुल्म-ए-हुस्न कोई कम नहीं यहाँ बोसे की ख़्वाहिशात शिकायत के साथ साथ इस आशिक़ी ने मुझ को सुख़न-वर बना दिया मैं शे'र कह रहा हूँ मुहब्बत के साथ साथ
A R Sahil "Aleeg"
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रात फिर से ख़्वाब में आई थी वो ज़ख़्म सारे इश्क़ के रिसने लगे
A R Sahil "Aleeg"
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