इबादत, मुहब्बत, सियासत सभी शरीफ़ों को अक्सर सताती ही हैं
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सभी का ख़ून है शामिल यहाँ की मिट्टी में किसी के बाप का हिन्दुस्तान थोड़ी है
Rahat Indori
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मोहब्बत अपनी क़िस्मत में नहीं है इबादत से गुज़ारा कर रहे है
Fahmi Badayuni
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अगर तू मुझ सेे शर्माती रहेगी मुहब्बत हाथ से जाती रहेगी
Tehzeeb Hafi
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अब तो पाँच मिनट के अंदर चेहरे बदले जाते हैं जीवन मिट्टी हो जाता था एक मुहब्बत होती थी
Ali Zaryoun
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तू ने जिस बात को इज़हार-ए-मुहब्बत समझा बात करने को बस इक बात रखी थी हम ने
Ameer Imam
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मौत से मिलना है मुझ को पूछना है इक पता वो पता जो मौत भी देने में शर्मा जाएगी
"Nadeem khan' Kaavish"
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यार तेरी चीज़ सब हम ने हटा दी इस नज़र से फेंक आया वो घड़ी भी जो कि लाई थी शहर से
"Nadeem khan' Kaavish"
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मेरे वतन को इन सियासी लोगों ने ही खा लिया ख़बर में अब ख़बर कहाँ, वही दो-चार रहते हैं
"Nadeem khan' Kaavish"
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तेरे दिल की इक ये बस्ती पहले उस इक राजा की थी जिस ने तेरे नाम पर जंगें भी बे-अंदाज़ा की थी क्या हुआ जो आपने रातों की नींदें मार डाली हम ने भी राहत व नुसरत सुनके यादें ताज़ा की थी
"Nadeem khan' Kaavish"
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मेरी बातों में नहीं आएगा चाँद रातों में नहीं आएगा जिस के हाथों में लिखा हूँ मैं, वो मेरे हाथों में नहीं आएगा
"Nadeem khan' Kaavish"
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