कहा किस ने कि हक़ में बात तुम मेरे करो न मेरे ज़ख़्म को ऐसे दुखाओ अब यहाँ
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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पाप का इक मैं दरिया ही हूँ डूबकर आप तर जाइए
Lalit Mohan Joshi
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खिड़कियाँ खोल सुब्ह होने को है चाँद भी यार अब तो सोने को है उड़ चुके हैं परिंदे भी अब तो साँस फसलें नई ये बोने को है
Lalit Mohan Joshi
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ये नज़र जो है तुम्हारी लड़कियों पर यार वो भी तो किसी की बेटियाँ हैं
Lalit Mohan Joshi
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शोर अंदर मेरे बढ़ता जा रहा है चेहरे पे उस का ही ग़म अब छा रहा है क्या कहा ज़ख़्मी हो तुम तो वार से फिर फिर तुम्हें वो बे-वफ़ा क्यूँ भा रहा है
Lalit Mohan Joshi
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चलो उस के लिए मैं उसी को छोड़ता हूँ सो मैं अब राब्ता ख़ुद से यारों जोड़ता हूँ मोहब्बत है यहाँ ख़ूब-सूरत तो सुनो फिर मोहब्बत की तरफ़ मुँह चलो अब मोड़ता हूँ करो चालाकियाँ तुम अगर तो देखना फिर मैं तुम सेे राब्ते सारे अब के तोड़ता हूँ
Lalit Mohan Joshi
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