कर रहा था ग़म-ए-जहाँ का हिसाब आज तुम याद बे-हिसाब आए
Related Sher
हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
149 likes
जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
368 likes
कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
354 likes
तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
339 likes
देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
300 likes
More from Faiz Ahmad Faiz
उन्हीं के फ़ैज़ से बाज़ार-ए-अक़्ल रौशन है, जो गाह गाह जुनूँ इख़्तियार करते रहे
Faiz Ahmad Faiz
20 likes
ये आरज़ू भी बड़ी चीज़ है मगर हमदम विसाल-ए-यार फ़क़त आरज़ू की बात नहीं
Faiz Ahmad Faiz
25 likes
जब तुझे याद कर लिया सुब्ह महक महक उठी जब तेरा ग़म जगा लिया रात मचल मचल गई
Faiz Ahmad Faiz
28 likes
आए कुछ अब्र कुछ शराब आए इस के बा'द आए जो अज़ाब आए
Faiz Ahmad Faiz
27 likes
कटते भी चलो, बढ़ते भी चलो, बाज़ू भी बहुत हैं, सर भी बहुत चलते भी चलो कि अब डेरे मंज़िल ही पे डाले जाएँगे
Faiz Ahmad Faiz
28 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Faiz Ahmad Faiz.
Similar Moods
More moods that pair well with Faiz Ahmad Faiz's sher.







