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ख़ुद को मैं ऐसा बनाना चाहता हूँ मुफ़्लिसों के काम आना चाहता हूँ नफ़रतों का दौर है लेकिन महोदय प्रेम का मैं गीत गाना चाहता हूँ

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ज़िन्दगी तेरी कहानी में मुझे रोज़ जीना रोज़ मरना पड़ता है

Kumar Aryan

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सख़्त मुश्किल है ये सफ़र मेरा कैसे होगा गुज़र-बसर मेरा वक़्त ने भी सितम किया मुझ पर छीनकर के अज़ीज़-तर मेरा छाँव देता था जो मुझे वो भी है ख़िज़ाँ दीदा अब शजर मेरा हो इजाज़त जहाँ से जाने की था यहीं तक मियाँ सफ़र मेरा जिन से आगे निकल गया मैं वो काटना चाहते हैं पर मेरा साँवरे मुझ को भूल मत जाना तेरा दर ही है अब तो घर मेरा कैसे कह दूँ कुमार मैं तुम सेे हाए जीवन है मुख़्तसर मेरा

Kumar Aryan

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साल बदलेंगे यक़ीं है यार पर लोग बदलेंगे यक़ीं कैसे करूँँ

Kumar Aryan

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प्रेम विश्वास है प्रेम धोखा नहीं प्रेम खुलकर करो कोई रोका नहीं

Kumar Aryan

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मीर तख़ल्लुस रख लेने से मीर कोई हो जाएगा क्या

Kumar Aryan

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