किसानों की यहाँ पे बात कोई भी नहीं सुनता कहाँ वो गाड़ियों जैसे ज़मीं बंजर बदलता है
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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ज़मीं भी सूख जाती है हमारे ही दिलों की यूँँ हमें देखे तरस तो फिर तरस को भी तरस आए
Raunak Karn
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तुम आ सको तो आओ मेरे पास मेरे घर सच है यही मैं ने तो तुम्हें छोड़ दिया है
Raunak Karn
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नहीं कहते किसी से भी अभी तकलीफ़ हम अपनी हमें मालूम है सुन कर सभी ठट्ठा उड़ाऍंगे
Raunak Karn
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यही तो बात है 'रौनक' यहाँ तो दर्द रहता है यहाँ तो यार तेरा आँख भी अख़गर बदलता है
Raunak Karn
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ज़माना देख लेगा कौन हैं हम वक़्त आने पर अभी ख़ुद को जलाऍंगे अभी ख़ुद को तपाऍंगे अभी तो जा रहे हैं डूब कर के मात खाने को मगर इक रोज़ रौनक़ बनके हम भी लौट आऍंगे
Raunak Karn
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