लड़कियाँ बैठी थीं पाँव डालकर रौशनी सी हो गई तालाब में
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तुम्हारे पाँव क़सम से बहुत ही प्यारे हैं ख़ुदा करे मेरे बच्चों की इन में जन्नत हो
Rafi Raza
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तारीकियों को आग लगे और दिया जले ये रात बैन करती रहे और दिया जले उस की ज़बाँ में इतना असर है कि निस्फ़ शब वो रौशनी की बात करे और दिया जले
Tehzeeb Hafi
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तुम्हें लौटा रहा हूँ ख़त तुम्हारे कभी तुम क्या थीं ख़ुद ही देख लेना
Gaurav Trivedi
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हुस्न कुछ और नहीं छत की हरी काई है वक़्त-बे-वक़्त जहाँ पाँव फिसल जाता है
Ashu Mishra
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मुझे अँधेरे से बात करनी है सो करा दो, दिया बुझा दो कुछ एक लम्हों को रौशनी का गला दबा दो, दिया बुझा दो रिवाज़-ए-महफ़िल निभा रहा हूँ बता रहा हूँ मैं जा रहा हूँ मुझे विदा दो, जो रोना चाहे उन्हें बुला दो, दिया बुझा दो
Vikram Gaur Vairagi
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मर भी जाऊँ तो कहाँ लोग भुला ही देंगे लफ़्ज़ मेरे मेरे होने की गवाही देंगे
Parveen Shakir
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उस से इक बार तो रूठूँ मैं उसी की मानिंद और मेरी तरह से वो मुझ को मनाने आए
Parveen Shakir
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ये दुख नहीं कि अँधेरो से सुल्ह की हम ने मलाल ये है कि अब सुब्ह की तलब भी नहीं
Parveen Shakir
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आधी रात की चुप में किस की चाप उभरती है छत पे कौन आता है सीढ़ियाँ नहीं खुलतीं
Parveen Shakir
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लड़कियों के दुख अजब होते हैं सुख उस से अजीब हँस रही हैं और काजल भीगता है साथ साथ
Parveen Shakir
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