मैं क्या करूँँ वो शख़्स ही इतना हसीन था चाहा नहीं था फिर भी पलटना पड़ा मुझे
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है
Shakeel Azmi
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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तुम इन्तिज़ार तो कर दोगे ख़त्म आ के मगर न कर सकोगे अदा मेरे इन्तिज़ार का हक़
Saif Dehlvi
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ता-उम्र तिरे पास ये बैठे न रहेंगे नादाँ तू बुज़ुर्गों को ज़रा वक़्त दिया कर
Saif Dehlvi
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दिन रात सुब्ह शाम कई साल लग गए पाने में ये मुक़ाम कई साल लग गए
Saif Dehlvi
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ये जुदाई तो एक रात की है फ़िक्र मुझ को मेरी हयात की है लोग मतलब से याद करते हैं 'सैफ़' ये रस्म क़ायनात की है
Saif Dehlvi
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यूँँ दर्द-ए-जुदाई में जीने से तो बेहतर है दरिया में उतर जाना दुनिया से गुज़र जाना
Saif Dehlvi
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