मिटी जा रही है ये दुनिया मुसलसल ये ऐसी वबा है दवा-साज़ तू क्यूँ बनाता नहीं है दवा-ए-उदासी
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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मेरी दुनिया में कोई चीज़ ठिकाने पे नहीं बस तुझे देख के लगता है कि सब अच्छा है
Idris Babar
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तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझ सेे तू किसी और ही मौसम की महक लाई थी डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे और तू मुट्ठियाँ भर-भर के नमक लाई थी
Tehzeeb Hafi
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तुम ने भी उन से ही मिलना होता है जिन लोगों से मेरा झगड़ा होता है तुम मेरी दुनिया में बिल्कुल ऐसे हो ताश में जैसे हुकुम का इक्का होता है
Zia Mazkoor
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भले दुनिया जला डाले मदारी तुम्हें तो बस तमाशा देखना है
Rohit Gustakh
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ज़िन्दगी रुख़ पर जो तेरे छाई है ये ख़ामुशी आ इसे मैं चीर दूँ पाज़ेब की झंकार से
Kiran K
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खिल रहे हैं आजकल जो मेरी पलकों पर नींद उन ख़्वाबों में ही बिखरी पड़ी होगी
Kiran K
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ग़ज़ल मेरी ये किस ने ज़ख़्म पर बाँधी है अपने मेरे अलफ़ाज़ किस के वास्ते मरहम हुए हैं
Kiran K
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उलझ जाती हूँ अक्सर आईने से मैं तक़ाबुल में जो ख़ुद को देखती हूँ अक्स तेरा ही उभरता है
Kiran K
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मोजिज़ा कुछ तो है उस की आवाज़ में ज़िन्दगी यूँँ नहीं ख़ुश-नवा है मिरी
Kiran K
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