नई नस्लें समझ पाएँ मुहब्बत के मआ'नी हमें इस वास्ते भी शा'इरी करनी पड़ेगी
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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क्या ग़लत-फ़हमी में रह जाने का सदमा कुछ नहीं वो मुझे समझा तो सकता था कि ऐसा कुछ नहीं इश्क़ से बच कर भी बंदा कुछ नहीं होता मगर ये भी सच है इश्क़ में बंदे का बचता कुछ नहीं
Tehzeeb Hafi
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कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है
Kumar Vishwas
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ज़ख़्म ऐसा दो मुझे अब इश्क़ में, के नील ही पड़ जाए मेरे दिल के अंदर
Dipendra Singh 'Raaz'
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दिल मेरा छोड़ आया उस के पास उस से ताख़ीर से मिला था मैं
Dipendra Singh 'Raaz'
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तुम न टूटो कभी भी इस लिए पत्थर है कहा मैं तुम्हें फूल जो कहता तो बिखर जाती तुम
Dipendra Singh 'Raaz'
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सीने से मांँ लगाए ही रखती है रात भर रोता हुआ जो नींद से उठ जाऊँ मैं कभी
Dipendra Singh 'Raaz'
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सबब तन्हाई का है वो मेरी कहती थी मुझ को जो किसी भी हाल में तुम को कभी तन्हा न छोडूंँगी
Dipendra Singh 'Raaz'
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