नींद है भूख है छाँव है धूप है जब तलक साँस है रंग है रूप है
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अपने में'यार से नीचे तो मैं आने से रहा शे'र भूखा हूँ मगर घास तो खाने से रहा
Mehshar Afridi
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मौत का एक दिन मुअय्यन है नींद क्यूँँ रात भर नहीं आती
Mirza Ghalib
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मैं साँसें तक लुटा सकता हूँ उस के इक इशारे पर मगर वो मेरे हर वादे को सरकारी समझता है
Rahat Indori
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मुझ ऐसा शख़्स अगर क़हक़हों से भर जाए ये साँस लेती उदासी तो घुट के मर जाए वो मेरे बा'द तरस जाएगा मोहब्बत को उसे ये कहना अगर हो सके तो मर जाए
Rakib Mukhtar
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नींद आएगी भला कैसे उसे शाम के बा'द रोटियाँ भी न मुयस्सर हों जिसे काम के बा'द
Azhar Iqbal
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ज़िन्दगी जीने का मतलब कुछ नहीं पर मौत भी मर्ज़ी से तो आती नहीं है
Umesh Maurya
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ये सारा खेल है बस दो घड़ी का नहीं कोई ठिकाना आदमी का
Umesh Maurya
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सुना है तुम भी शाइ'र बन रहे हो तुम्हें भी चोट गहरी लग गई क्या
Umesh Maurya
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उस की याद न आएगी तो क्या हो जाएगा मेरा मन कोना-कोना सूना हो जाएगा
Umesh Maurya
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मौसम हरदम सर्द बना सा रहता है मीठा-मीठा दर्द बना सा रहता है
Umesh Maurya
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