परवानों को जो रोक सके तूफ़ाँ ऐसा पैदा न हुआ
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प्यार दो बार थोड़ी होता है हो तो फिर प्यार थोड़ी होता है यही बेहतर है तुम उसे रोको मुझ सेे इनकार थोड़ी होता है
Zubair Ali Tabish
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बस ये दिक़्क़त है भुलाने में उसे उस के बदले में किस को याद करें
Fahmi Badayuni
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हुस्न बला का क़ातिल हो पर आख़िर को बेचारा है इश्क़ तो वो क़ातिल जिस ने अपनों को भी मारा है ये धोखे देता आया है दिल को भी दुनिया को भी इस के छल ने खार किया है सहरा में लैला को भी
Jaun Elia
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मेरे होंटों पे किसी लम्स की ख़्वाहिश है शदीद ऐसा कुछ कर मुझे सिगरेट को जलाना न पड़े
Umair Najmi
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हम इक ही लौ में जलाते रहे ग़ज़ल अपनी नई हवा से बचाते रहे ग़ज़ल अपनी दरअस्ल उस को फ़क़त चाय ख़त्म करनी थी हम उस के कप को सुनाते रहे ग़ज़ल अपनी
Zubair Ali Tabish
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तमाम उम्र हमें साथ साथ चलना है बस इतना कह के सफ़र कर लिया जुदा उस ने
Ajeetendra Aazi Tamaam
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ज़िंदगी भी आख़िरश तंहाई है मैं भला तन्हाई से क्यूँ डर गया
Ajeetendra Aazi Tamaam
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जल्दी जल्दी सभी पुराने कामों को पूरा कर लो वक़्त ने बदली हैं तारीखें नया कलंडर आता है
Ajeetendra Aazi Tamaam
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आदतन तुम अपनी बातों से फिरोगे था पता दिल है दिल का क्या करें बस इश्क़ की तामील की
Ajeetendra Aazi Tamaam
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कहते हैं सामिईन उसे जाम-ए-जम-ए-हुस्न वो जाम बिन पिए ही जो बहकाए आप को
Ajeetendra Aazi Tamaam
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