फिर मिरी बात का उन को न बुरा लग जाए चल दिया उन की ही महफ़िल से तबस्सुम रख कर
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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ज़िंदगी मुझ को तिरी अब तो ज़रूरत ही नहीं उस की तस्वीर ही जीने के लिए काफ़ी है
salman khan "samar"
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उम्र भर याद आऊँगा उस को जिस की मैं शॉल ओढ़ आया हूँ
salman khan "samar"
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उफ़ आदतन ही छोड़ के जाता हुआ ये दिन कुछ उम्र मेरी और घटा कर चला गया
salman khan "samar"
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उस के क़रीब बैठ के ख़ामोश क्यूँँ रहा दिल चाहता था उस सेे ज़रा गुफ़्तगू करूँँ
salman khan "samar"
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तू हक़ीक़त तू फ़साना दिल मिरा तेरा दिवाना
salman khan "samar"
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