tazkira dehli-e-marhum ka ai dost na chhed na suna jaega hum se ye fasana hargiz
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तितली से दोस्ती न गुलाबों का शौक़ है मेरी तरह उसे भी किताबों का शौक़ है
Charagh Sharma
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मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से ये जो लौंडे हैं मेरे पाँव दबाने लग जाए
Mehshar Afridi
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अब उस की शादी का क़िस्सा न छेड़ो बस इतना कह दो कैसी लग रही थी
Zubair Ali Tabish
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बात करो रूठे यारों से सन्नाटों से डर जाते हैं प्यार अकेला जी लेता है दोस्त अकेले मर जाते हैं
Kumar Vishwas
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अब दोस्त कोई लाओ मुक़ाबिल में हमारे दुश्मन तो कोई क़द के बराबर नहीं निकला
Munawwar Rana
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हम ने हर अदना को आ'ला कर दिया ख़ाकसारी अपनी काम आई बहुत
Altaf Hussain Hali
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हम ने अव्वल से पढ़ी है ये किताब आख़िर तक हम से पूछे कोई होती है मोहब्बत कैसी
Altaf Hussain Hali
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वो उम्मीद क्या जिस की हो इंतिहा वो वा'दा नहीं जो वफ़ा हो गया
Altaf Hussain Hali
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हम जिस पे मर रहे हैं वो है बात ही कुछ और आलम में तुझ से लाख सही तू मगर कहाँ
Altaf Hussain Hali
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यही है इबादत यही दीन-ओ-ईमाँ कि काम आए दुनिया में इंसाँ के इंसाँ
Altaf Hussain Hali
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