था झूठा वा'दा मगर ए'तिबार हम ने किया तमाम रात तेरा इंतिज़ार हम ने किया
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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वो झूठ बोल रहा था बड़े सलीक़े से मैं ए'तिबार न करता तो और क्या करता
Waseem Barelvi
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मैं रस्मन कह रहा हूँ ''फिर मिलेंगे'' ये मत समझो कि वा'दा कर रहा हूँ
Zubair Ali Tabish
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तेरे सिवा भी कई रंग ख़ुश नज़र थे मगर जो तुझ को देख चुका हो वो और क्या देखे
Parveen Shakir
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रेख़्ता हाथ में ज़मीं भी नहीं बात करते हो आसमानों की
Rekhta Pataulvi
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मेरे सुख़न से लतीफ़े तराशे लोगों ने कि ज़हर भी तो हँसी में उगल रहे हैं लोग इसी में रेख़्ता अब ख़ैर है कि ख़ार बनो वो देखो फूलों को कैसे मसल रहे हैं लोग
Rekhta Pataulvi
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हज़ारों आंधियाँ तूफ़ान आए और गए यारो चराग़-ए-रेख़्ता मद्धम सही पर अब भी जलता है
Rekhta Pataulvi
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सारे हुक़ूक़ छीन चुके मेरे घर के लोग अपने ही घर में रहता हूँ मेहमान की तरह
Rekhta Pataulvi
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एक आलम की नज़रें हैं मुझ पर और मेरे जाम में ज़रा सी है
Rekhta Pataulvi
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