तुम्हारा ज़िक्र जब भी आया क़िस्से में सभी ने हॅंस के बोला, हाए लानत हैं
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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मिला था जिस बग़ीचे में वो अब शमशान लगता है मुहब्बत ने ये कैसे दिन दिखाए हैं मुहब्बत में
"Nadeem khan' Kaavish"
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मौत से मिलना है मुझ को पूछना है इक पता वो पता जो मौत भी देने में शर्मा जाएगी
"Nadeem khan' Kaavish"
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यार अब तो काफ़ी ज़्यादा सज गई हो फिर भी तुम को हम पुरानी लिख रहे हैं
"Nadeem khan' Kaavish"
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सजी थी उदासी की महफ़िल जहाँ वहाँ पर हमें ही बुलाया गया
"Nadeem khan' Kaavish"
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ना आँखें, ना बातें, ना साँसे, ना ही दिल हाँ लेकिन मिलाओ कभी हाथ हम सेे
"Nadeem khan' Kaavish"
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