उसे अभी भी मेरे दिल के हाल का नहीं पता तो या'नी उस को अपने घर का रास्ता नहीं पता ये तेरी भूल है ऐ मेरे ख़ुश-ख़याल के मुझे पराई औरतों से तेरा राब्ता नहीं पता
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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बनता तो यही है कि तुझे मुँह न लगाऊँ पर तू मुझे प्यारा भी तो लगता है बराबर
Ruqayyah Maalik
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उसे कहो कि वो खिड़की से झाँक ले इक बार वो दिल में रह नहीं सकता तो फिर नज़र में रहे
Ruqayyah Maalik
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हमें पिंजरे में पर भेजे गए हैं ये तोहफ़े सोच कर भेजे गए हैं
Ruqayyah Maalik
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दिल ने पहले पहल तो उस की कमी तस्लीम की फिर कहीं आँखों ने अपनी बेबसी तस्लीम की तुझ से मिलते ही मुझे पहली मोहब्बत हो गई और मैं ने वो मोहब्बत आख़िरी तस्लीम की
Ruqayyah Maalik
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इक तो वो दिल दुखाता है दिन में हज़ार बार ऊपर से ख़ुश भी रहता है, कितना अजीब है
Ruqayyah Maalik
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