दिल ने पहले पहल तो उस की कमी तस्लीम की फिर कहीं आँखों ने अपनी बेबसी तस्लीम की तुझ से मिलते ही मुझे पहली मोहब्बत हो गई और मैं ने वो मोहब्बत आख़िरी तस्लीम की
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होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है
Nida Fazli
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ख़ुद से भी मिल न सको, इतने पास मत होना इश्क़ तो करना, मगर देवदास मत होना देखना, चाहना, फिर माँगना, या खो देना ये सारे खेल हैं, इन में उदास मत होना
Kumar Vishwas
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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बनता तो यही है कि तुझे मुँह न लगाऊँ पर तू मुझे प्यारा भी तो लगता है बराबर
Ruqayyah Maalik
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उसे कहो कि वो खिड़की से झाँक ले इक बार वो दिल में रह नहीं सकता तो फिर नज़र में रहे
Ruqayyah Maalik
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उसे अभी भी मेरे दिल के हाल का नहीं पता तो या'नी उस को अपने घर का रास्ता नहीं पता ये तेरी भूल है ऐ मेरे ख़ुश-ख़याल के मुझे पराई औरतों से तेरा राब्ता नहीं पता
Ruqayyah Maalik
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हमें पिंजरे में पर भेजे गए हैं ये तोहफ़े सोच कर भेजे गए हैं
Ruqayyah Maalik
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इक तो वो दिल दुखाता है दिन में हज़ार बार ऊपर से ख़ुश भी रहता है, कितना अजीब है
Ruqayyah Maalik
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