उसे कहो कि वो खिड़की से झाँक ले इक बार वो दिल में रह नहीं सकता तो फिर नज़र में रहे
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा
Sahir Ludhianvi
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बनता तो यही है कि तुझे मुँह न लगाऊँ पर तू मुझे प्यारा भी तो लगता है बराबर
Ruqayyah Maalik
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दिल ने पहले पहल तो उस की कमी तस्लीम की फिर कहीं आँखों ने अपनी बेबसी तस्लीम की तुझ से मिलते ही मुझे पहली मोहब्बत हो गई और मैं ने वो मोहब्बत आख़िरी तस्लीम की
Ruqayyah Maalik
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हमें पिंजरे में पर भेजे गए हैं ये तोहफ़े सोच कर भेजे गए हैं
Ruqayyah Maalik
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उसे अभी भी मेरे दिल के हाल का नहीं पता तो या'नी उस को अपने घर का रास्ता नहीं पता ये तेरी भूल है ऐ मेरे ख़ुश-ख़याल के मुझे पराई औरतों से तेरा राब्ता नहीं पता
Ruqayyah Maalik
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इक तो वो दिल दुखाता है दिन में हज़ार बार ऊपर से ख़ुश भी रहता है, कितना अजीब है
Ruqayyah Maalik
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