ये तो मालूम था उल्फ़त में ख़सारा होगा पर ये सोचा ही नहीं सिर्फ़ हमारा होगा
Related Sher
हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
373 likes
शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
435 likes
तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
339 likes
कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
521 likes
तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
401 likes
More from Wajid Husain Sahil
सब्र आने की देर है वरना तू भी दिल से उतर ही जाएगा
Wajid Husain Sahil
0 likes
यूँँ इन आँखों को तड़पने की सज़ा दी उस ने अपनी तस्वीर ही डीपी से हटा दी उस ने
Wajid Husain Sahil
1 likes
वो शख़्स जो नज़रों से बहुत दूर है लेकिन पहरो उसे तकता हूँ मैं ख़्वाबों में बुला कर
Wajid Husain Sahil
1 likes
सवाल अपनी अना का जहाँ भी आ जाए वहाँ पे सर नहीं पगड़ी बचानी पड़ती है
Wajid Husain Sahil
1 likes
जुदा होकर कोई अपनो से ऐसा टूट जाता है की जैसे चोट से पत्थर की शीशा टूट जाता है मुझे डोली उठानी थी मगर मय्यत उठाता हूँ है ये भी फ़र्ज़ पर इस में तो काँधा टूट जाता है
Wajid Husain Sahil
1 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Wajid Husain Sahil.
Similar Moods
More moods that pair well with Wajid Husain Sahil's sher.







