ज़ख़्मों पे ज़ख़्म खाए ज़माने गुज़र गए पत्थर भी घर में आए ज़माने गुज़र गए मेरी निगाह अब भी उसी सिम्त है मगर खिड़की पे उस को आए ज़माने गुज़र गए
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मैं बाल बाल बच गया हर बार इश्क़ से सर के बहुत क़रीब से पत्थर गुज़र गए
Umair Najmi
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साल के आख़िरी दिन उस ने दिया वक़्त हमें अब तो ये साल कई साल नहीं गुज़रेगा
Shariq Kaifi
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कैसे आकाश में सूराख़ नहीं हो सकता एक पत्थर तो तबीअ'त से उछालो यारो
Dushyant Kumar
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मैं ने चाहा था ज़ख़्म भर जाएँ ज़ख़्म ही ज़ख़्म भर गए मुझ में
Ammar Iqbal
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तुम बड़े अच्छे वक़्त पर आए आज इक ज़ख़्म की ज़रूरत थी
Zubair Ali Tabish
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ग़म-ज़दा गीत गुनगुनाना है हाल-ए-दिल आप को सुनाना है
Navneet krishna
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आप को अपना बनाना चाहता हूँ इक नई दुनिया बसाना चाहता हूँ आप को मैं आज़माना चाहता हूँ इक नया ये कारनामा चाहता हूँ
Navneet krishna
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लाख दुश्मन करें यहाँ कोशिश सत्य हैं हम तो हम को काल कहाँ
Navneet krishna
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घुट-घुट के जिए मर न सके हाए रे क़िस्मत इस दौर में जीना भी मेरी जान कला है
Navneet krishna
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हो गया मशहूर मैं दीवाना तेरे शहर में बन गया अफ़साने का अफ़साना तेरे शहर में
Navneet krishna
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