ज़बाँ से अपने न हम कहें कुछ न वो कहें कुछ नज़र समझ ले नज़र की हरकत वो शा'इरी है
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अब ज़रूरी तो नहीं है कि वो सब कुछ कह दे दिल में जो कुछ भी हो आँखों से नज़र आता है मैं उस सेे सिर्फ़ ये कहता हूँ कि घर जाना है और वो मारने मरने पे उतर आता है
Tehzeeb Hafi
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कुछ न कुछ बोलते रहो हम सेे चुप रहोगे तो लोग सुन लेंगे
Fahmi Badayuni
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होश वालों को ख़बर क्या बे-ख़ुदी क्या चीज़ है इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है
Nida Fazli
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मेरी दुनिया उजड़ गई इस में तुम इसे हादसा समझते हो आख़िरी रास्ता तो बाक़ी है आख़िरी रास्ता समझते हो
Himanshi babra KATIB
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तुम उन के वा'दे का ज़िक्र उन से क्यूँँ करो 'ग़ालिब' ये क्या कि तुम कहो और वो कहें कि याद नहीं
Mirza Ghalib
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तेरी हर अदा है दिलकश तेरा हुस्न दिलरुबा है तुझे जब से मैं ने देखा मुझे इश्क़ हो गया है
Talha Lakhnavi
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तुझे याद करते करते मैं ये सोचता हूँ अक्सर तेरा हिज्र भी न हो तो मेरे पास और क्या है
Talha Lakhnavi
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कभी सोचा है तुम ने क्या गुज़रती है दिवाने पर के जब तुम ज़ुल्फ़ बिखरा कर निकल आते हो शाने पर
Talha Lakhnavi
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इक तरफ़ हुस्न-ए-तबस्सुम इक तरफ़ हुस्न-ए-हया और उस पर जान लेवा आप की अँगड़ाई है
Talha Lakhnavi
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बयान करना है मुश्किल वो इतने नाज़ुक हैं कि जैसे होता है इक दिल वो इतने नाज़ुक हैं सँभाल पाते नहीं उस का बोझ भी अक्सर जो ले के आएँ हैं इक तिल वो इतने नाज़ुक हैं
Talha Lakhnavi
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