अहल-ए-सरवत ने बिगाड़ा है ज़माने का चलन हम फ़क़ीरों ने ज़माने को मोहब्बत दी है
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ख़ूब-सूरत ये मोहब्बत में सज़ा दी उस ने फिर गले मिल के मेरी उम्र बढ़ा दी उस ने
Manzar Bhopali
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जहाँ तक मुझ सेे मतलब है जहाँ को वही तक मुझ को पूछा जा रहा है ज़माने पर भरोसा करने वालों भरोसे का ज़माना जा रहा है
Naeem Akhtar Khadimi
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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तुम भी वैसे थे मगर तुम को ख़ुदा रहने दिया इस तरह तुम को ज़माने से जुदा रहने दिया
Khalil Ur Rehman Qamar
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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रेख़्ता हाथ में ज़मीं भी नहीं बात करते हो आसमानों की
Rekhta Pataulvi
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मेरे सुख़न से लतीफ़े तराशे लोगों ने कि ज़हर भी तो हँसी में उगल रहे हैं लोग इसी में रेख़्ता अब ख़ैर है कि ख़ार बनो वो देखो फूलों को कैसे मसल रहे हैं लोग
Rekhta Pataulvi
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इस भरी काइनात में या रब अपने रहने को एक घर भी नहीं पेड़ के नीचे जो गुज़र जाए ज़िन्दगी इतनी मुख़्तसर भी नहीं
Rekhta Pataulvi
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हज़ारों आंधियाँ तूफ़ान आए और गए यारो चराग़-ए-रेख़्ता मद्धम सही पर अब भी जलता है
Rekhta Pataulvi
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एक आलम की नज़रें हैं मुझ पर और मेरे जाम में ज़रा सी है
Rekhta Pataulvi
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