इस दौर में हम इन्सानों की कुछ बातें बहुत ही न्यारी हैं अब हम सेे भी ज़्यादा तो हमारे बर्तन शाकाहारी हैं
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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वो अब मेरा नहीं ये मानना आसाँ यूँँ हो जाए बराबर एक्स के कुछ मान लेना जितना आसाँ था
SHIV SAFAR
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रह जाएगा ये दीद-ए-असद ख़्वाब ही ‘सफ़र’ ‘ग़ालिब’ के दौर में जो न जन्में तो अब मरो
SHIV SAFAR
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मख़मली बिस्तर तो घर में कल ही मैं ला दूँ मगर सोचता हूँ नींद आँखों में कहाँ से लाऊॅंगा
SHIV SAFAR
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ये दुनिया जो अपनों को भी याद नहीं अब करती है मुझ को याद रखेगी इस उम्मीद पे ही दम तोड़ा हूँ
SHIV SAFAR
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आँसू हो तेरे पास तो तू भी ख़रीद ला ग़म की दुकाँ में बिकती है ख़ुशियाँ बड़ी बड़ी
SHIV SAFAR
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