जो राहें थीं ये फूलों सी वाँ पर सारे दलदल निकले तू इतना भी बेबस मत कर इस दिल से फिर हलचल निकले
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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दिल के दरवाज़े भेड़ कर देखो जख़्म सारे उधेड़ कर देखो बंद कमरे में आईने से कभी तुम मेरा जिक्र छेड़ कर देखो
Sandeep Thakur
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तुम्हें पता है मिरे हाथ की लकीरों में तुम्हारे नाम के सारे हुरूफ़ बनते हैं
Fareeha Naqvi
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मन में एक इरादा होता है ताबिश राजा पहले प्यादा होता है ताबिश मानता हूँ मजबूरियाँ थीं कुछ दिक्कत थी पर वा'दा तो वा'दा होता है ताबिश
Vishal Singh Tabish
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इक दूसरे को छोड़ के जाने की बात है अपनी नहीं ये सारे ज़माने की बात है बस यूँँ समझ लो उन सेे मेरा कद बलंद है जिन के लबों पे मुझ को गिराने की बात है
Kashif Sayyed
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ज़िंदगी से एक दिन मैं ने कहा था प्यार है ज़िंदगी ने बात मेरी दोस्ती पर रोक दी
Divya 'Kumar Sahab'
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ध्यान रखना चुप न हो जाए कहीं वो हक़ जता कर जो तुझे समझा रहा है
Divya 'Kumar Sahab'
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आज इक बहती नदी को मोड़ कर के देखा है वक़्त के इस बाँध को अब तोड़ कर के देखा है जब लिखा था वो लगा था सिर्फ़ राधा कृष्ण सा बस हमारा नाम मैं ने जोड़ कर के देखा है
Divya 'Kumar Sahab'
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ये नहीं हैं शब्द केवल जो भी तुम ये सुन रही सिर्फ़ लिखते ही नहीं अब, बोलते हम हैं तुझे
Divya 'Kumar Sahab'
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हम होते भी इक कैसे फिर, वो है जोगन, पाखंडी मैं आँखों से फिर ऐसा पकड़ा, उस का दिल था और बंदी मैं
Divya 'Kumar Sahab'
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