किसी महफ़िल में हम जब प्यारे प्यारे शे'र कहते हैं तेरे भौं के इशारे के सहारे शे'र कहते हैं नहीं कुछ ख़ासियत मेरी है मेरे शे'र कहने में सभी आशिक़ सभी प्रीतम तुम्हारे शे'र कहते हैं
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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ज़िन्दगी की उलझनों की फ़िक्र करना छोड़ कर हम तेरी ज़ुल्फों में उलझने की तमन्ना कर रहे हैं
Alankrat Srivastava
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तुम सेे सुंदर होंगी तो होंगी बस राधा रानी जू वरना तो तीनों लोकों में तुम सेा सुंदर कोई नईं
Alankrat Srivastava
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मेरा जीवन भी मरण भी राम हैं और आख़िर में शरण भी राम हैं
Alankrat Srivastava
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कौन कहता है ये दूर मुझ सेे हो तुम तुम सेे रौशन हूँ मैं नूर मुझ सेे हो तुम
Alankrat Srivastava
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चार मिसरे जो उस्ताद ने थे दिए पढ़ के उस्ताद ख़ुद को बताने लगे
Alankrat Srivastava
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