मुंतज़िर हूँ मैं तिरा राधा वगरना, गोपियाँ इस शहर की भी कम नहीं हैं
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
Jaun Elia
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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वो लड़ कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस से मोहब्बत एक तरफ़ है उस से झगड़ा एक तरफ़
Varun Anand
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जंग या मुहब्बत में है अगर जो सब जायज़ क़त्ल करते हम उन का शा'इरी नहीं करते
Kuldeep Tripathi KD
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मौत आई तो डाँट खाएगी इतनी भी कोई देर करता है
Kuldeep Tripathi KD
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हुई ग़लती यही कह कर वो लहजा भूल जाते हैं चढ़ा लो सर जिन्हें अक्सर वो लहजा भूल जाते हैं दरख़्तों को दिया पानी बुझाई प्यास भी उन की मगर बरसात को पाकर वो लहजा भूल जाते हैं
Kuldeep Tripathi KD
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इश्क़ है जाने क्या क्या सिखा देता है पहले लगता था पंखा हवा देता है दूसरे इश्क़ से हम ने समझा यही ज़ख़्म मरहम से ख़ुद ही मिला देता है
Kuldeep Tripathi KD
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मुमताज़ बनने से रही तू, हाँ मगर ज़िंदा भले तू बोल चुनवा दूँ तुझे
Kuldeep Tripathi KD
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