पहुँचता था हमेशा देर से ही , मुझ सेे मिलने को कि जिस भी शख़्स से मिलने की मुझ को जल्दी होती थी
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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हम तो कुछ देर हँस भी लेते हैं दिल हमेशा उदास रहता है
Bashir Badr
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मैं क्या कहूँ के मुझे सब्र क्यूँँ नहीं आता मैं क्या करूँँ के तुझे देखने की आदत है
Ahmad Faraz
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ये तो बस मेरा मुक़द्दर नईं सही वरना कोई ऐब नईं “दीवानी“ में
karan singh rajput
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कि तेरे ख़त जलाना चाहते थे हम न जाने हाथ अपना क्यूँँ जला बैठे
karan singh rajput
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ये कैसा जादू तू ने कर दिया है मुझ पे मेरी जाँ? किसी को भी मैं देखूँ चेहरा तेरा याद आता है
karan singh rajput
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कि अब तो नींद से भी है तमाम सी शिकायतें न जाने बात क्या है जो नज़र में आती ही नहीं
karan singh rajput
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कि हम लड़के है हम पर ही ब'अद में दोष आना है मोहब्बत करता है तो कर पर अपना भी मुनाफ़ा देख
karan singh rajput
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