रोज़ ख़्वाबों में मुझे दिखता तेरा घर काश नींदों में कभी मैं चल भी पाता
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चाँदी सोना एक तरफ़ तेरा होना एक तरफ़ एक तरफ़ तेरी आँखें जादू टोना एक तरफ़
Gyan Prakash Akul
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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सब को ही है तकलीफ़ किसी ना किसी से तो तकलीफ़ को बिल्कुल नहीं तकलीफ़ किसी से
Krishnakant Kabk
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कैसे हम को अलग करोगे हम इक दूजे के मानी हैं
Krishnakant Kabk
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रंग जब बनकर गवाह आया तेरी तासीर का मैं ने ये आलम भी देखा है तेरी तस्वीर का
Krishnakant Kabk
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मेरे हाथों से तेरा हाथ इक पल छूट जाता है मुझे अक्सर डरा कर के ये सपना टूट जाता है यहाँ माँझा लिपटने में लगे रहते सभी अपना कोई चुपके से आ कर के पतंगे लूट जाता है
Krishnakant Kabk
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मौसम यही है प्यार का सावन अभी आया नहीं
Krishnakant Kabk
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