टूटता है जिस्म से साँसों का धागा आइए आख़िरी दीदार मेरा मेरे हमदम कीजिए
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अब इन जले हुए जिस्मों पे ख़ुद ही साया करो तुम्हें कहा था बता कर क़रीब आया करो मैं उस के बा'द महिनों उदास रहता हूँ मज़ाक में भी मुझे हाथ मत लगाया करो
Tehzeeb Hafi
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बिठा दिया है सिपाही के दिल में डर उस ने तलाशी दी है दुपट्टा उतार कर उस ने मैं इस लिए भी उसे ख़ुद-कुशी से रोकता हूँ लिखा हुआ है मेरा नाम जिस्म पर उस ने
Zia Mazkoor
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तमाम जिस्म को आँखें बना के राह तको तमाम खेल मुहब्बत में इंतिज़ार का है
Munawwar Rana
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मेरी दुनिया उजड़ गई इस में तुम इसे हादसा समझते हो आख़िरी रास्ता तो बाक़ी है आख़िरी रास्ता समझते हो
Himanshi babra KATIB
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तुम ने कैसे उस के जिस्म की ख़ुशबू से इनकार किया उस पर पानी फेंक के देखो कच्ची मिट्टी जैसा है
Tehzeeb Hafi
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ज़िंदगी उजड़े हुए घर की तरह लगती है बाप का साया अगर सर पे नहीं होता है
Shajar Abbas
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ज़िंदगी तो दर-ब-दर खिलवा रही थी ठोकरें मौत ने लो मंज़िल-ए-मकसूद पर पहुँचा दिया
Shajar Abbas
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ज़िंदगी से ख़ुश है कोई ज़िंदगी से तंग है हर किसी का ज़िंदगी जीने का अपना ढंग है मैं ने जो दुनिया को समझा तो मुझे आया समझ निस्फ़ है रंगीन दुनिया निस्फ़ ये बे-रंग है
Shajar Abbas
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ज़िंदगी को जो जाना तो ये जुज़ मिला ज़िंदगी दर्द है दर्द है ज़िंदगी
Shajar Abbas
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ज़ुल्म मज़लूमों पे ढाना छोड़ दो हक़ यतीमों का दबाना छोड़ दो ये नहीं कर सकते तो बेहतर है ये सर को सज्दे में झुकाना छोड़ दो
Shajar Abbas
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