वो मेरी फाल्गुनी, मैं उस का माँझी हूँ मैं शब्दों से ग़ज़लों के पर्वत खोदूँगा
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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शायद मुझे किसी से मोहब्बत नहीं हुई लेकिन यक़ीन सब को दिलाता रहा हूँ मैं
Jaun Elia
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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पास थे हम मगर कुछ ऐसे थे जनवरी थी वो मैं दिसंबर था
Prit
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मरे भी तो तड़प तड़प के मरे ज़िंदगी भी हलाल में गुज़री
Prit
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थोड़ा उलझे मसाइल-ए-दिल में कुछ परेशाँ दिमाग़ ने किया था रात से जंग जीत जाते मगर ये अँधेरा चराग़ ने किया था
Prit
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जिस्म छलनी हो चुका है रूह घाइल हो चुकी है प्यार में कान्हा के मीरा कितनी पागल हो चुकी है तेरे दर्शन की तमन्ना में निकल आई है घर से ज़हर पी कर प्रेम बरसाए वो बादल हो चुकी है
Prit
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आप कुछ ज़्यादा अपने आप से हैं वरना मुझ में तो कोई भी कमी नइँ
Prit
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