जाने कितने गहरे होते हैं वो अल्फाज़ जो अक्सर ख़ामोशी में सुनाई देते हैं
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कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे
Jaun Elia
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तू मोहब्बत से कोई चाल तो चल हार जाने का हौसला है मुझे
Ahmad Faraz
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मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से ये जो लौंडे हैं मेरे पाँव दबाने लग जाए
Mehshar Afridi
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बात करो रूठे यारों से सन्नाटों से डर जाते हैं प्यार अकेला जी लेता है दोस्त अकेले मर जाते हैं
Kumar Vishwas
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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ज़िंदगी मुझ को तिरी अब तो ज़रूरत ही नहीं उस की तस्वीर ही जीने के लिए काफ़ी है
salman khan "samar"
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याद ग़ालिब ने किया है हम को अपने शहर में तो लाज़मी है हम सभी पर इल्म कुछ हासिल करेंगे
salman khan "samar"
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उर्दू से इश्क़ या इश्क़ से उर्दू है नाम कुछ भी हो ख़ुशबू तो दोनों में है
salman khan "samar"
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शादी में गुलाबी सी जो कुर्ती वो पहन ले दुनिया की निगाहें तो अटक जाए उसी पे
salman khan "samar"
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ये पता चलता आज़माने पर कौन रोता है दूर जाने पर मैं अलग हूँ ज़रा ज़माने से मुस्कुराता हूँ मैं सताने पर
salman khan "samar"
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