sherKuch Alfaaz

जला जंगल सबब इक पेड़ था बस जहाँ ने देखा है 'रोहित' का रुतबा

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तरीक़े और भी हैं इस तरह परखा नहीं जाता चराग़ों को हवा के सामने रक्खा नहीं जाता मोहब्बत फ़ैसला करती है पहले चंद लम्हों में जहाँ पर इश्क़ होता है वहाँ​ सोचा नहीं जाता

Abrar Kashif

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आज देखा है तुझ को देर के बा'द आज का दिन गुज़र न जाए कहीं

Nasir Kazmi

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लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में तुम तरस नहीं खाते बस्तियाँ जलाने में

Bashir Badr

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मैं न कहता था हिज्र कुछ भी नहीं ख़ुद को हलकान कर रही थी तुम कितने आराम से हैं हम दोनों देखा बेकार डर रही थी तुम

Mehshar Afridi

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ये किस ने बाग़ से उस शख़्स को बुला लिया है परिंद उड़ गए पेड़ों ने मुँह बना लिया है उसे पता था मैं छूने में वक़्त लेता हूँ सो उस ने वस्ल का दौरानिया बढ़ा लिया है

Tehzeeb Hafi

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