रात अचानक जब सिर दुखने लगता है अम्मा आँखों में उतराने लगती है
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उन के गेसू खुलें तो यार बने बात मेरी इक रबर बैंड ने जकड़ी हुई है रात मेरी
Zubair Ali Tabish
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मौत का एक दिन मुअय्यन है नींद क्यूँँ रात भर नहीं आती
Mirza Ghalib
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हाल मीठे फलों का मत पूछो रात दिन चाकूओं में रहते हैं
Fahmi Badayuni
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बे-दिली क्या यूँँही दिन गुज़र जाएँगे सिर्फ़ ज़िंदा रहे हम तो मर जाएँगे
Jaun Elia
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नई फ़स्लों को ये कुछ और से कुछ और करते हैं गुलाबों की जो ख़ुशबू ढूॅंढ़ते हैं रातरानी में
nakul kumar
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ज़िन्दाबाद करो उस आशिक़ का जो ज़ंजीरों में भी हँस कर बोल रहा पायल की छम छम ज़िन्दाबाद रहे
Atul K Rai
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ज़रा सी देर उठने में हुई क्या लगे सब पाँव दक्षिण ओर करने
Atul K Rai
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उम्मीदों का मरना या'नी मर जाने की तैयारी है!
Atul K Rai
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बरखा किए बग़ैर ही बादल चले गए गर्मी से फिर ज़मीन की चमड़ी उधड़ गई
Atul K Rai
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इक दफ़ा बस इक दफ़ा उस को हमारे साथ कर छत पे फिर से बैठ कर तारे गिनेंगे रात कर खेल कोई हो विजयश्री प्रेम के हिस्से में लिख जितने धोखेबाज़ हैं हिस्से में उन के मात कर
Atul K Rai
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